फूल बने हम .................. भूलकर न किसी की राहों के शूल बने हम , सदा हँसते सुंगंध बिखेरते हुए फूल बने हम I पत्थर को माथे पर सजाता नहीं कोई , इसके लिए तो पावन स्वर्णिम धूल बने हम I धरा संग न बहे ,न हीं प्रतिरोध करें उसका ,…
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कक्षा -12 हिंदी साहित्य –पाठ -1 “जयशंकर प्रसाद” ( क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया…
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