ना बैठो यूं किनारों पे ------------ अगर तुम चूमना चाहो , फलक चाँद सितारों के , मोजों से लड़ना ही होगा , ना बैठो यूं किनारों पे I गुलों से गुलशन में खुशबू , यूँ ही नहीं आती , तमाम रात …
Read moreछलें गये हम , नारों में , खड़ें है अब , लाचारों में , नेक मिले एक , हजारों में , झूठे , बेईमान दो चारों में , कांटें ही मिले , बहारों में , धोखे ही मिले , हजारों में छलें गये हम , नारों में , खड़ें है अब , बीमारों…
Read more;g vykSfdd n’kZu dh 'kfDr gesa] ijefirk ijekRek ls izkIr gqbZ gSA ftlds dkj.k ge lgh o xyr] mfpr o vuqfpr] lqanj o foHkRl] HkO; o xkS.k ]bR;kfn n`’;ksa dk voyksdu djus esa l{ke gq, gSa A ijUrq ;g dguk vuqfpr ugha gksx…
Read moreबच्चों अगर ठान लो मन में , नहीं असंभव कोई काम । अपनी मदद स्वयं जो करता , मदद उसी की करते राम। अपनी मंज़िल पाने की , अगर तुम्हें है ,सच्ची चाह। मुश्किलें हो कितनी भी , मिल ही जाएगी कोई राह। जो धुन के प…
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कक्षा -12 हिंदी साहित्य –पाठ -1 “जयशंकर प्रसाद” ( क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया…
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