😂कुछ मीठा ,कुछ खट्टा🥳 ---
हर गली ,सडक ,चौराहे, पर,
सन्नाटा,ख़ामोशी सी छाई है.
कोरोना के कोविड़19 ने कैसे ,
पुरे विश्व की बैंड बजाई है .
सीलबंद सीमायें, घर द्वार बंद ,
पडोसी दूर ,दूर -दूर भाई-भाई है ,
पैदल बंद , बंद है बस,ट्रेन,कार ,
प्रतिबंधित सभी ,यात्रा हवाई है .
हाथ ,पैर ढके ,हसीन चेहरे छुपे ,
नाक कटी हो जैसे, सबने छुपाई है.
मुखोटों से छिपे, जोकर ही लग रहे ,
कोरोना से बचे है ,या इज्जत बचाई है.
बच्चे भी भय से नजदीक कहाँ ?
आती नहीं पास ,अब तो लुगाई है,
छत पर आती नहीं ,प्यारी पड़ोसन भी ,
घर में पड़ा है वो ,जो कसम-कसाई है .
करोना से घर रहते ,कुछ करो –ना ,
बीबी करती रोज -रोज चतुराई है.
कल लगवाया घर में, झाड़ू पौछा ,
आज सारी चद्दर ,बेडशीट धुलवाई है .
रोजमर्रा की चीजों के, लाले पड़ गए ,
हुए चौगुने दाम ,खूब बढ़ी मंहगाई है.
घी मक्खन अब सब, मयस्सर नहीं ,
पानी सा आता दुध ,गायब मलाई है.
घंटो टोकन लेकर खड़ा हूँ लाइन में .
माँ -बाप की नहीं मिल रही दवाई है .
चौराहे पर पुलिस वाले मिल गए .
मत पूछो करी कैसी मेरी ठुकाई है .
रोजगार था मंद, काम-दाम अब बंद ,
दिहाड़ी -मजदूरों की चौपट कमाई है,
हतभागे कर्मवीरों के ,हृदय में अथाह दुःख
उन अभागो ने ,चटनी से रोटी खाई है.
थोड़े में ही, ज्यादा समझो ,
जार-जार रोता ,दिल बड़ा हरजाई है .
मन की हमारे, फकीरी देख -देख ,
रुंध गया गला मेरा ,आंखे भर आई है.
चींटी है चुटकी से ,मसल दूंगा ,
ऐसी कहावत ,किसने बनाई है.
इसमें अपेक्षित ,करो सुधार भैया ,
चींटी ने हाथी को ,धुल चटाई है.
सृष्टी को बाधने के लालच में ,
हमने हमेशा ,बड़ी कीमत चुकाई है .
आगे निकलने की, दौड़ कैसी ,
जिसने पतन की , खोदी खाई है,
पी.म.मोदी जी ने अब २१ दिनों की ,
घर में ही सड़ने को, यातना बताई है.
यातना नहीं ये ,साधना हमारे लिए ,
तेरी मेरी ,देश की भी इसी में भलाई है.
सयंम ,धैर्य ,में ही होगी बुद्धिमानी ,
कुछ दिन की हमें ,मिली तनहाई है.
फिर से घर- घर में ,खुशहाली होगी ,
निर्वासन ही एकमात्र, इसकी दवाई है. .
कल रात सपने में, बोले भोले बाबा,
संकट में ही, हे !मानव , घंटा-घंटी बजाई है .
स्वार्थ ,लालसा, और कामना में रहते सदा.
खुशियों में भी कभी तुम्हे , मेरी याद आई है .
हरी –भरी प्रकृति ,उस पर नेक इंसान ,
मैंने स्वर्ग सी सुन्दर दुनिया बनाई है.
प्यार, मोह्ब्बत ,करुणा,दया ,ममता ,
अच्छे गुणों से, तुम्हारी दुनिया सजाई है .
तुम्हे छल, प्रपंच ,झूंठ ,अन्याय ही भाया,
अपने काले कारनामों से , फैलाई बुराई है.
“कर भला तो हो भला “ एक मन्त्र दिया है .
इस मन्त्र का पालन करने में, अच्छाई है.
मानव हो, मानवता का संकल्प करो,
नेक इंसानों पे ,मैंने सदा ही कृपा बरसाई है.
तुम स्वयं पत्थर बनकर, मुझे पाषाण मानो .
निश्चित समझो तांडव होगा , सृष्टी की तबाई है.
(ओम नम; शिवाय )
✍️कुमार महेश (25-03-2020)✍️
(रेप - गीत की तर्ज पर )


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