सब उसका करम होता है....



24-03-2020
 
सब उसका करम होता है .......
हमारी तृष्णाओं से, संकट का जनम होता है I
खुद को खुदा माने तो, अज़ब सितम होता है I

हमारी  हर खता  पर ,वो आवाज़ तो देता है I
कौन है?जो देखता होगा,हमको भरम होता है I

गुनाह के दल दल में, आयाम बहुत बनाते है I
जमीर मारकर भी ,कब-कोई बेशरम होता है I

कामयाबी के जूनून में,रब से नाता तोड़ देते है I
किसी का चमन उजड़े, हमें कब गम होता है?

जब जान पर बन आती है, तो वो याद आता है I
सब कुछ पाने का सफ़र,एकपल में ख़त्म होता है I

हवा हो जाती बुलंदी ,अंदाज़ भी बदल जाते है I
बेसबब कुछ नहीं होता,सब उसका करम होता है I

गर मन से उसे पुकारें  ,यक़ीनन माफ़ कर देगा I
नेमत ही बख्शेगा   ,दिल उसका  नरम होता है I

कुमार महेश (24-03-2020)
(व्यथित मन का सृजन)



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