प्रेम (LOVE)

 प्रेम (LOVE)
*आत्मा की सुरभि प्रेम है , है प्रेम ह्रदयों का योग।*
*होता अजीब ही एहसास है,हो जब संजोग-वियोग।।*
*त्याग तपस्या समर्पण है, किन्तु दुनिया समझे भोग।*
*प्रेम पंथ है मुक्ति का , प्रेम को ना समझो कोई रोग।।*

कुमार महेश (07/04/2020)

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