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| HINDI QUIZ-KAVITA KE BAHANE |
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कुमार महेश
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HINDI QUIZ -Chapter 3 (Class12)
HINDI QUIZ -Chapter 3 (Class12)
HINDI Quiz
कुमार महेश ,रा.उ.मा.वि.डिडवाना,दौसा
कवि कुवंर नारायण को साहित्य जगत के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था I
- 2005 के लिए
- 2007 के लिए
- 2004 के लिए
- 2009 के लिए
‘कविता के बहाने ‘ कविता कवि कुवंर नारायण की निम्न काव्य संग्रह से ली गयी है –
- चक्रव्यूह
- इन दिनों
- कोई दूसरा नहीं
- आमने –सामने
कविता के बहाने कविता के कवि है –
- कुँवर सिंह
- कुवंर नारायण
- कुँवर प्रकाश
- कुँवर प्रसाद
कविता की उड़ान को कौन नहीं जान सकता?
- रसिक व्यक्त
- चिड़िया
- कवि
- समीक्षक
कवि कुवंर नारायण जी का जन्म कब हुआ था ?
- 27 सितंम्बर ,सन 1926
- 30 अगस्त , सन 1930
- 19 सितम्बर ,सन 1927
- 19 अक्तूबर , सन 1932
‘कविता के बहाने’ कविता की तुलना किससे सार्थक मानी गई है –
- चिड़िया की उड़ान
- फूल का खिलना
- बच्चे का खेलना
- इनमें से कोई नहीं
इनमे से कौनसी रचना कुंवर नारायण कि नहिँ है
- कोई दूसरा नहीं
- अपने सामने
- आज और आज से पहले।
- कल और आज
कविता किस के बहाने खेल रही थी?
- बच्चे के
- खिलौने के
- पेंच के
- भाषा के
‘कविता के बहाने’ कविता की की विशेषताएँ हैं –
- चिड़िया के बारे में बताना
- कविता बच्चों के समान होती है
- कविता सर्वव्यापक एवं कालजयी है ये समझाना
- इनमें से कोई नहीं
कविता के अनुसार बिना मुरझाए कौन महकता है
- कविता
- बच्चे
- फूल
- फल
‘बच्चों के बहाने ‘ में कौन अलंकार है
- श्लेष
- उपमा
- रूपक
- अनुप्रास
'सब घर एक कर देने' का आशय है-
- भेदभाव नहीं रखना
- तोड़-फोड़ करना
- सीमा में रहना
- शोर मचाना
'कविता के पंख लगा उड़ने' से तात्पर्य है-
- व्यर्थ लिखना
- शब्द-अर्थ में विसंगति
- कल्पना करना
- स्पष्ट करना
कविता किस का खेल है?
- बच्चों का
- चिड़िया का
- शब्दों का
- फूलों का
कविता फूलों के बहाने क्या है?
- गिनना
- खिलना
- मुरझाना
- बहकना
कविता किस के बहाने एक उड़ान है?
- अतीत
- बालक
- चिड़िया
- प्रेमिका
‘कविता के बहाने’ कविता में व्यक्त की गई है –
- चिड़िया की उड़ान
- फूल का खिलना
- बच्चे को खेलना
- कविता की सम्भावना
कविता के बिना मुरझाए महकने का अर्थ है –
- कभी पुराना न होना
- फूल की तरह सुगंध देना
- देश-काल से परे रहकर रसात्मक बने रहना
- कभी न मुरझाना
कुँवर नारायण अज्ञेय द्वारा संपादित कौनसे तार सप्तक के प्रमुख कवियों में रहे हैं -
- तीसरा सप्तक (१९५९)
- दूसरा सप्तक(१९४९-५१)
- चौथा सप्तक (1979 ईस्वी)
- पहला सप्तक (1943 ई०)
कुँवर नारायण के प्रबंध काव्य का नाम है -
- 'चक्रव्यूह'
- वाजश्रवा के बहाने
- 'आत्मजयी'
- परिवेश : हम-तुम
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