मेरी पहचान कर दो------------ साँसे छिन लो तुम बे-जान कर दो। हमारी जान को अब जान कर दो। ************************* न आहें निकले,न बद्दुआऐं ही मेरी, काट के मेरी जबाँ ,बेजुबान कर दो। **************************…
Read moreघातक लगती है...... फैली जो वैश्विक बीमारी अब ,घातक लगती है । हम इंसानो की लाचारी अब, घातक लगती है ।। हाथ मिलाना करना यारी अब ,घातक लगती हैं। मिलना-जुलना, रिश्तेदारी अब, घातक लगती हैं।। हर प्रिय-प्रियतमा …
Read moreहो अब दरबदर गया......... उसने वादे भी किये और हमेशा मुकर गया, दोस्तो का काम-तमाम कर के निखर गया। अपनी शाहीन बातों में उलझा कर छल गया, इल्जाम हमेशा दूसरो पे लगा के बिफर गया। आह ,आँसू से वो पिघला नहीं, "पत्…
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कक्षा -12 हिंदी साहित्य –पाठ -1 “जयशंकर प्रसाद” ( क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया…
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