कहाँ इतनी ऊंचाई होती…


कहाँ इतनी ऊंचाई होती….


                                                                       27-03-2020 

रब ने हमारी वाली जल्दी में ना बनाई होती .
वह बी.पी.एल.कोटे से ही वो क्यूँ आई होती .
जोड़ियाँ रब ने बनाई सबकी, इंसाफ ही होगा,
मैंने सोचा, ये भी तो किसी की लुगाई होती .
ये बात भी हमने आप को यूँ ना बताई होती ,
किसी ने खुबसूरत सी तस्वीर ना लगायी होती .
हर फूल की खुशबू मयस्सर नहीं होती हरेक को,
हसरते लाख रखो, हर मर्ज की दवाई नहीं होती.
जीवन के सूनेपन में प्रीत की गंध ना बहाई होती.
समर्पण नहीं मिलता उसका ,हर तरफ तन्हाई होती.
कामनी,रागनी,मंदाकनी,जीवन-संगनी,न वो कहाई होती .
और वो नहीं होती संग महेश की कहाँ इतनी ऊंचाई होती.

# कुमार महेश # २७-०३-२०२०






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