हो अब दरबदर गया......... उसने वादे भी किये और हमेशा मुकर गया, दोस्तो का काम-तमाम कर के निखर गया। अपनी शाहीन बातों में उलझा कर छल गया, इल्जाम हमेशा दूसरो पे लगा के बिफर गया। आह ,आँसू से वो पिघला नहीं, "पत्…
Read moreकसक बहुत होती है......... कसक बहुत होती है, जब भगवानो पर पथराव होते हैं। कानून व्यवस्था को बनाने वालों संग टकराव होते हैं। फूल की जगह पत्थर" हैं, खाली-दिमाग शैतानी-घर हैं , गुमराह हैं युवा ऊर्जा और शक्ति…
Read moreसब परेशान और त्रस्त है............. यह कैसा अजीब सा डर है, ज़िन्दगी बेबस और पस्त हैं। कैदगाहो में कैदी सा जीवन, सब परेशान और त्रस्त है। हैं यह किसके जुर्म की सजा,भले-बुरे सब अभागे बने, साया हैं या बुरी छाया हैं…
Read moreयूँही भटक गया हो इंसान.......... रोगी था,मनोरोगी था,था पागल,सटक गया इंसान, मानो बेअसर थे जहर सारे, यूँही गटक गया इंसान। अपने चैनो-अमन की ख़ातिर,नींद जग की छिनके, जुनून और खुमारी में नाहक, यूँही मटक गया इंसान।…
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कक्षा -12 हिंदी साहित्य –पाठ -1 “जयशंकर प्रसाद” ( क) देवसेना का गीत (ख) कार्नेलिया…
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