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Change the way not the intention |
Change the way not the intention तरीके बदलो ,इरादे नहीं .
बचपन में शैतानीयाँ सभी ने की होगी, किसी
ने कम तो किसी ने ज्यादा ।और पेड से फल भी सभी ने चुराए होगें। चुराए
थे ना, सच बोलना , मैंनें तो चुराए थे। ऐसी ही एक कहानी है एक लडके की
- जब वो स्कूल जाता था तो रास्ते में एक बाग पडता था , आम का बाग।सीजन
में बाग आम से लदा होता था। आमों को देखकर लडके का मन रोज ललचाता था। पर उस बाग
में हमेशा माली रहता था। एक दिन उसने देखा की माली सो रहा था। उसके लिए यह बहुत ही
अच्छा मौका था। ।
वो चुपचाप बाग के अंदर गया ।
पेड पर हर तरफ आम ही आम थे पर पेडों की ऊँचाई थोडी ज्यादा थी। तो उस लडके ने सोचा
क्यूँ न पत्थर मार कर आम तोड लिये जायें। भगवान ने चाहा तो एक-दो आम तो हाथ लग ही
जायेगें।यह सोच कर उसने बहुत सारे पत्थर इकठ्ठे किए और फिर एक आम पर पत्थर मारना
शुरू कर दिया । उसने बहुत सारे पत्थर मारे पर एक भी आम नीचे नहीं गिरा । फिर यह
सोच कर की इस पेड से तो शायद मुझे आम मिलेंगें ही नहीं उसने दूसरे पेड पर पत्थर
मारना शुरू कर दिया , वो पत्थर मारता जा रहा था I वो पत्थर मारता जा रहा था ,पर
एक भी आम टूटकर नीचे नहीं गिरा, उसके हाथ अभी तक कुछ नहीं लगा। उसने बहुत सारे पेडों पर कोशिश की पर वो एक बार
भी सफल नहीं हुआ। हर बार वो विफल ही हुआ ।और फिर वो अपनी किस्मत को कोसने लगा।
मेरी तो किस्मत ही खराब है। कितने प्रयास नहीं किये मैंनें ? पर कुछ हाथ नहीं लगा । भगवान भी नहीं चाहते की मुझे एक भी
आम मिले ?

जैसा की हम सब लोग करते है, अपने सारे प्रयासों के बावजूद सफलता नहीं मिलती तो भगवान को
दोष मढने लग जाते है। ऐसा ही वो कर रहा था। ऐसा सोचते हुए वो लडका निराश होकर बाग
से बाहर जाने लगा। दूर लेटा माली चुपचाप ये सब देख रहा था। उसने बाग से बाहर जाते
हुए लडके को बुलाया। लडका पहले तो डर गया पर माली ने जब प्यार से उसकी निराशा और
उदासी का कारण पूछा तो लडके ने बाग में जो भी हुआ वो सब माली को बता दिया। माली भी
हँसने लगा .और पास बैठाकर लडके से कहा -जब तुमने एक पेड को बहुत सारे पत्थर मारे
और एक भी आम नहीं गिरा तो तुमने आम तोडने के तरीके को नहीं बदला। बल्कि पेड ही बदल
दिया। तुमने वहीं तरीका दूसरे पेड पर भी आजमाया पर फिर भी आम नहीं गिरें।तुमने फिर
पेड बदल लिया। तुमने हर बार पेड बदला। पर तुमने अपना तरीका नहीं बदला। माना की पेड
ऊँचा था, पर जितना प्रयास और ऊर्जा तुमने
अलग अलग पेडों पर लगाई उतनी एक पेड पर लगा देते ,अपने तरीके को बदलते ,पत्थर मारने की बजाए थोडी हिम्मत करके पेड पर चढ जाते तो एक चैथाई प्रयासों
में ही तुम सफल हो जाते । तो तुम जितना चाहते उतने आम तोड सकते थे। अब लग रहा है न
तुमकों की कितना आसान तो था “आम तोडना”। पर तुमने सोचा ही नहीं।

दोस्तो! ऐसे ही तो होता है हमारी लाइफ में ,और
स्टूण्डेट लाइफ से ही स्टार्ट हो जाता है ये किस्सा। हम अलग अलग क्षेत्रों में
अपनी किस्मत आजमाते है। जब सफल नहीं होते तो काम के तरीके नहीं बदलते । बल्कि काम
का क्षेत्र ही बदल देते है। हम जीवन में सफलता तो चाहते है। उपलब्धियाँ तो चाहते
है।पर हमारे प्रयास बिखरे हुए होते है। हमारा लक्ष्य तय नहीं होता । ये एक्टीविटी
शायद हम सब ने बचपन में कभी ना कभी की हो
जिसमें लेंस को कागज के सामने पकड के रखते है।और दूसरी ओर से सूरज की रौशनी लेंस
से होकर कागज पर पडती है।जब कागज के एक छोटे से हिस्से पर वो कुछ समय के लिए फोकस
रहती है तो कागज जलने लग जाता है । याद है ना बस यही है – “key to success सफलता का मंत्र” ।

सोच समझ कर पहले गोल सेट करो। ये मेरा लक्ष्य है ,इसी काम
के लिए मैं बना हूँ । और यहीं मुझे करना है। फिर अपनी पूरी ताकत अपने पूरे प्रयास
लगा दिजिए उसी काम पर । दूनिया की कोई ताकत आप को अपने लक्ष्य को हासिल करने से
रोक नहीं सकती । अगर जिन्दगी में कुछ पाना
है कुछ बनना है तो -तरीके बदलो। इरादे नहीं और अर्जुन बन जाओ। जिसे कुछ नहीं दिखा
था सिर्फ और सिर्फ चिडिया की आँख के अलावा। ।
कुमार महेश ,
लालसोट ,राजस्थान
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